जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई)

दिनांक : 01/04/2005 - | Sector: ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र

जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई) राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देने वाली एक योजना है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता (आशा) सरकार और गर्भवती महिलाओं के बीच एक प्रभावी कड़ी के रूप में कार्य करती हैं तथा उन्हें इस कार्यक्रम के अंतर्गत प्रोत्साहन राशि दी जाती है। गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) के परिवारों की सभी महिलाओं तथा अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) की उन महिलाओं को इस योजना का लाभ दिया जाता है, जो सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों, जैसे उपकेंद्र (एससी), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), प्रथम रेफरल इकाई (एफआरयू) अथवा जिला या राज्य अस्पताल के सामान्य वार्ड में प्रसव कराती हैं।

जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई) राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) के अंतर्गत सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देने वाली एक योजना है। इसका उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को संस्थागत प्रसव के लिए प्रोत्साहित करके मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करना है। यह योजना सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में लागू की गई है, जिसमें कम प्रदर्शन करने वाले राज्यों (एलपीएस) पर विशेष ध्यान दिया गया है।.
जननी सुरक्षा योजना अप्रैल 2005 में राष्ट्रीय मातृत्व लाभ योजना (एनएमबीएस) में संशोधन करके शुरू की गई थी। राष्ट्रीय मातृत्व लाभ योजना अगस्त 1995 में राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (एनएसएपी) के एक घटक के रूप में लागू हुई थी। वर्ष 2001-02 के दौरान इस योजना को ग्रामीण विकास मंत्रालय से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को स्थानांतरित कर दिया गया था।राष्ट्रीय मातृत्व लाभ योजना के अंतर्गत 19 वर्ष या उससे अधिक आयु की गर्भवती महिलाओं, जो गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) के परिवारों से संबंधित थीं, को अधिकतम दो जीवित बच्चों के जन्म तक प्रति प्रसव ₹500 की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती थी। जननी सुरक्षा योजना शुरू होने पर राष्ट्रीय मातृत्व लाभ योजना के अंतर्गत पूरे देश में बीपीएल गर्भवती महिलाओं को समान रूप से दी जाने वाली ₹500 की आर्थिक सहायता के स्थान पर राज्यों के वर्गीकरण तथा लाभार्थी के ग्रामीण या शहरी क्षेत्र में रहने के आधार पर अलग-अलग सहायता राशि निर्धारित की गई। संस्थागत प्रसव की दर के आधार पर राज्यों को कम प्रदर्शन करने वाले राज्य (एलपीएस) और उच्च प्रदर्शन करने वाले राज्य (एचपीएस) के रूप में वर्गीकृत किया गया। जिन राज्यों में संस्थागत प्रसव की दर 25% या उससे कम थी, उन्हें कम प्रदर्शन करने वाले राज्य कहा गया, जबकि 25% से अधिक संस्थागत प्रसव दर वाले राज्यों को उच्च प्रदर्शन करने वाले राज्य के रूप में वर्गीकृत किया गया। इसके अनुसार, पूर्ववर्ती विशेष श्रेणी के राज्यों (ईएजी) में शामिल उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, राजस्थान और ओडिशा के साथ असम तथा जम्मू-कश्मीर को कम प्रदर्शन करने वाले राज्यों की श्रेणी में रखा गया था। शेष राज्यों को उच्च प्रदर्शन करने वाले राज्यों की श्रेणी में रखा गया।

Beneficiary:

गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) के परिवारों और अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग से संबंधित सभी गर्भवती महिलाएँ।

लाभ:

गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) के परिवारों और अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग से संबंधित सभी गर्भवती महिलाएँ। जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई) के अंतर्गत पात्र गर्भवती महिलाएँ सरकारी या मान्यता प्राप्त निजी स्वास्थ्य संस्थान में प्रसव कराने पर माता की आयु और बच्चों की संख्या की परवाह किए बिना नकद सहायता प्राप्त करने की पात्र हैं।

How To Apply

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण निदेशालय से आवेदन करें।