तुलुनी
तुलुनी सुमी नागा समुदाय का अत्यंत महत्त्वपूर्ण पारंपरिक त्योहार है। यह त्योहार वर्ष के उस समय मनाया जाता है, जब फसलें भरपूर मात्रा में उपलब्ध होती हैं। इसे जुलाई के महीने में मनाया जाता है और यह सुमी समुदाय के सबसे बड़े तथा उत्साहपूर्ण त्योहारों में से एक है।
इस त्योहार में सामूहिक भोज का विशेष महत्त्व होता है। भोज के दौरान चावल से बनी पारंपरिक मदिरा अनिवार्य रूप से परोसी जाती है। इसे केले के पत्ते से बने पात्र में दिया जाता है। इस मदिरा को ‘तुलुनी’ कहा जाता है और इसी के नाम पर त्योहार का नाम तुलुनी पड़ा। इसे ‘अन्नी’ भी कहा जाता है, जिसका संबंध भरपूर फसल के मौसम से है।
तुलुनी त्योहार के दौरान मंगनी हो चुके युवक और युवती एक-दूसरे को भोजन तथा उपहारों से भरी टोकरियाँ देते हैं। होने वाले दूल्हे को होने वाली दुल्हन के घर भव्य भोज के लिए आमंत्रित किया जाता है। दोनों परिवारों के भाई-बहन भी एक-दूसरे के साथ भोजन, पका हुआ खाना और मांस बाँटते हैं। यह त्योहार बच्चों की देखभाल करने वालों के लिए भी खुशी का अवसर होता है। इस दिन उन्हें भरपेट भोजन और मांस दिया जाता है। कृषक सामान्यतः समूहों में मिलकर खेती करते हैं। वे तुलुनी त्योहार के लिए पहले से धन जमा करते हैं, जिससे सूअर या गाय खरीदी जाती है। पशुओं को काटकर उनका मांस समूह के सदस्यों में बाँटा जाता है। बचाकर रखा गया मांस सामूहिक भोज में उपयोग किया जाता है। इस दौरान समूह के अन्य सदस्य अपने नेताओं को विशेष रूप से मांस परोसकर सम्मान देते हैं। प्रत्येक कृषक समूह में सामान्यतः २० से ३० सदस्य होते हैं, जिनमें कई महिलाएँ भी शामिल होती हैं। इस भव्य भोज के अवसर पर नए सदस्यों को भी समूह में शामिल किया जाता है। यह त्योहार मंगनी और विवाह संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए भी महत्त्वपूर्ण माना जाता है। त्योहार के उत्साह को लोकगीतों और वीरगाथाओं के सामूहिक गायन से और भी बढ़ाया जाता है। सुमी समुदाय में दो प्रमुख कुल समूह माने जाते हैं—स्वू (सुमी) और तुकू (तुकुमी)। इन दोनों समूहों की अलग-अलग परंपराओं के कारण उनके धार्मिक निषेधों, रीति-रिवाजों और अनुष्ठानों में अंतर पाया जाता है। अन्य त्योहारों की तुलना में सुमी समुदाय तुलुनी को सबसे भव्य और महत्त्वपूर्ण त्योहारों में से एक मानता है।
अहूना
अहूना सुमी नागा समुदाय का एक पारंपरिक फसल कटाई के बाद मनाया जाने वाला त्योहार है। यह वर्ष की फसल के लिए आभार व्यक्त करने और आने वाले नए वर्ष में सुख-समृद्धि तथा सौभाग्य प्राप्त करने की कामना से मनाया जाता है।
इस अवसर पर पूरा समुदाय मिलकर उत्सव की तैयारी करता है। त्योहार का प्रमुख आकर्षण नई फसल से प्राप्त चावल का पहला भोजन तैयार करना और सामूहिक रूप से ग्रहण करना है। इस भोजन को बाँस के खोखले खंडों में पकाया जाता है। खाना पकाने और परोसने के लिए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों से नए पात्र बनाए जाते हैं। इन पात्रों को आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में आसानी से उपलब्ध सामग्रियों से तैयार किया जाता है। अहूना त्योहार सुमी नागा समुदाय की कृषि संस्कृति, सामुदायिक एकता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है। यह त्योहार लोगों को एक साथ लाता है और नई फसल के साथ नए वर्ष के लिए आशा तथा समृद्धि का संदेश देता है।